मौसम में बदलाव के साथ लोगों की सेहत पर प्रदूषण की मार भी पड़ने लगी है और अस्पतालों में सांस के मरीज बढ़ने लगे हैं। डॉक्टर कहते हैं कि दिल्ली की आबोहवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि लोग ना चाहते हुए भी धूमपान करने वालों की तरह चेन स्मोकर बन रहे हैं।
वहीं, दिल्ली के लोधी रोड के साथ कई अन्य इलाकों में हवा में प्रदूषण का स्तर कई गुना बना हुआ है। एयर क्वालिटी इंडेक्स के मुताबिक, लोदी रोड इलाके में हवा बेहद खराब है।
अस्पतालों में 40-45 फीसद सांस के मरीज बढ़ गए हैं। इसके अलावा अस्थमा व ब्रोंकाइटिस के मरीज भी बढ़ गए हैं। गंगाराम अस्पताल के चेस्ट मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉ. बॉबी भलोत्र ने कहा कि दिवाली के बाद से ही सांस के मरीज अधिक देखे जा रहे हैं।
सड़कों पर वाहनों से निकलने वाला धुआं व वातारण में प्रदूषण के रूप में फैले पार्टिकुलेट मैटर (पीएम)-2.5, पीएम-10 व कई तरह की हानिकारक गैस शरीर में प्रवेश कर रही हैं। यह दो-चार सिगरेट पीने से अधिक घातक है।
एम्स के पल्मोनरी मेडिसिन के सहायक प्रोफेसर डॉ. करण मदन ने कहा कि सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने के कारण हर साल मरीजों की संख्या बढ़ जाती है और अस्थमा के मरीजों को परेशानी अधिक होती है। इस बार भी पिछले कई दिनों से अस्थमा व सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के मरीज बढ़ गए हैं।
अपोलो अस्पताल के श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश चावला ने कहा कि प्रदूषण के दुष्प्रभाव से श्वास नली में सूजन होने से सांस लेने में भी परेशानी शुरू हो जाती है। इसके अलावा प्रदूषण के कण सांस के जरिये फेफड़े में प्रवेश कर जाते हैं।
इससे अस्थमा का अटैक होने की आंशका बढ़ जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि अस्थमा के मरीजों को इन दिनों ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। कोहरे में सुबह नहीं टहलना चाहिए साथ ही डॉक्टर से मिलकर दवाओं के बारे में बात कर लेनी चाहिए।

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